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चौपाल- ‘उनकी याद में’

Chaupal – “Unki yaad mein”

 

मैं उनका आदर्श, कहीं जो व्यथा न खोल सकेंगे,

पूछेगा जग, किन्तु, पिता का नाम न बोल सकेंगे,

जिनका निखिल विश्व में कोई कहीं न अपना होगा,

मन में लिये उमंग जिन्हें चिर-काल कलपना होगा।”

 

 

Recitation of Dinkar’s poem

यह पंक्तियां  रश्मिरथी काव्य में कर्ण द्वारा कही गयी हैं। इसके रचनाकार हैं भारत के राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर। दिनकर जी का जन्म सिमरिया, बिहार में 23 सितम्बर 1908 को हुआ।उनके सम्पूर्ण जीवन में उन्हें पद्मभूषण के अलावा कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उनके काव्य रचना के कारण वह देश के राष्ट्रकवि बन गए।
उनके जन्म तिथि पर हमने ‘उनकी याद में’ नामक  कार्यक्रम का आयोजन रखा जो हमारे “चौपाल” का तीसरा अध्याय था। परंतु कुछ कारणवश हमें उनके लिए आयोजित कार्यक्रम को अगले दिन के लिए टालना पड़ा। सत्यवती सांध्य की जगह अब यह कार्यक्रम AB-93, शाहजहाँ रोड , इंडिया गेट के पास, UPSC के सामने, नयी दिल्ली में आयोजित किया गया। 24 सितम्बर को यह कार्यक्रम 2 बजे से रखा गया।
नए तिथि तथा नए स्थान के बावजूद भी दिनकर तथा चौपाल को चाहने वालों की कमी नहीं थी। हर व्यक्ति उसी उत्साह और उसी उल्लास के साथ उपस्थित था। कार्यक्रम शुरू हुआ और लोगों का जमावड़ा भी बढ़ने लगा।
सबने दिनकर की पंक्तियों का उल्लेख इस प्रकार किया मानो वह हर क्षण को जी रहा हो। उनकी काव्य रचना से   पूरा माहौल उल्लास से भर गया।

Prof. Vinay Kumar imparting his knowlege of Dinkar

इस अवसर पर हमारे दो अतिथि भी वहां उपस्थित थे, प्रोफेसर विनय कुमार जो स्वयं दिल्ली विश्वविद्यालय में हिंदी पढ़ाते है तथा राज देहलवी जो स्वयं एक कवि हैं। देहलवी साहब ने दिनकर जी की पंगतियों को गुनगुनाया और प्रोफेसर साहब ने दिनकर जी की काव्य क्षमता का उल्लेख करते हुए दिनकर जी का चरित्र चित्रण किया और वहां पे उपस्थित सभी लोगों को नए ज्ञान से रूबरू कराया। उपस्थित लोगों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया।
कवि और उसकी रचना कभी नहीं मरती। यह चौपाल इस बात का प्रमाण था की आज भी हम दिनकर जी और उनकी कवितायों को याद करते हैं।और इस प्रकार हमारे चौपाल का तीसरा अध्याय भी खत्म हुआ। लोगों ने कुल्हड़ वाली चाय का भी खूब आनंद लिया।